इश्क़Ishqमोहब्बत · लगन · जुनून

मेड विद इश्क़ फ़ेलोशिप

अपने ख़यालों कोहक़ीक़त दें।

उन लोगों के लिए एक मुफ़्त फ़ेलोशिप, जिनके पास कोई ख़याल है, कोई मसला है, या बस कुछ बनाने की ज़िद।

AI की मदद से कुछ ऐसा बनाइए, जिसे लोग सचमुच इस्तेमाल करें।

टूल्स का ख़र्च हमारा। बनाने का जुनून आपका।

वेटलिस्ट में नाम लिखवाएँ

0 फ़ीस · 0% इक्विटीआपका काम, आपका ही रहेगा।

दरख़्वास्तें 15 नवंबर 2026 से ली जाएँगी।

01 — इस कोशिश की वजह

हुनर हर जगह है। मौक़े हर जगह नहीं।

आज सही AI टूल्स के साथ एक अकेला शख़्स भी वह बना सकता है, जिसके लिए कभी पूरी टीम की ज़रूरत पड़ती थी।

मगर अच्छे टूल्स मुफ़्त नहीं आते।

लखनऊ के आसपास किसी छोटे-से क़स्बे में बैठा एक शख़्स भी उतने ही बड़े ख़्वाब देख सकता है, जितने बेंगलुरु में बैठा कोई और।

फ़र्क़ अक्सर क़ाबिलियत का नहीं, मौक़ों और साधनों का होता है।

मेड विद इश्क़ फ़ेलोशिप इसी फ़ासले को कम करने की एक छोटी-सी कोशिश है।

02 — हमारा यक़ीन

  • पिच डेक से पहले मसला।
  • सर्टिफ़िकेट से पहले काम।
  • डिग्री से पहले सीखने की ललक।
  • जजों से पहले असली यूज़र।
  • AI आपकी क़ाबिलियत बढ़ाता है।
  • बनाने का मौक़ा किसे मिलेगा, इसका फ़ैसला उसकी जेब नहीं करनी चाहिए।

03 — बनाने का हमारा तरीक़ा

AI का खुलकर इस्तेमाल करें।

रिसर्च से डिज़ाइन, कोड से लॉन्च तक—AI का बेझिझक इस्तेमाल कीजिए।

हमें इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आपने कितनी लाइनें कोड ख़ुद लिखीं।

मायने यह रखता है कि आपने क्या बनाया, क्यों बनाया, और क्या वह किसी के काम आया।

हमारे लिए ज़रूरी है कि आप:

  • जिस मसले को चुना है, उसे अच्छी तरह समझें।
  • अपने हर फ़ैसले की वजह बता सकें।
  • जल्द कुछ बनाकर लोगों के सामने रखें।
  • उनकी राय सुनें, सीखें और अपने काम को बेहतर बनाएँ।
  1. ख़याल
  2. रिसर्च
  3. प्रोटोटाइप
  4. लॉन्च
  5. यूज़र
  6. फ़ीडबैक
  7. और बेहतर

04 — आपके लिए क्या है

बनाने के सफ़र में, हम आपके साथ हैं।

  1. 01

    AI टूल्स का ख़र्च, हमारे ज़िम्मे

    फ़ेलोशिप के पूरे 12 हफ़्तों तक एक बेहतरीन AI कोडिंग टूल का पेड एक्सेस।

    ताकि पैसों की वजह से आपका काम न रुके।

  2. 02

    हर हफ़्ते खुलकर बात

    हर हफ़्ते एक लाइव मुलाक़ात।

    आप दिखाएँगे कि क्या बनाया, कहाँ अटके, और आगे क्या करने वाले हैं।

    मिलकर आगे का रास्ता तय करेंगे।

  3. 03

    बनाने वालों का छोटा-सा क़ाफ़िला

    एक छोटा समूह, जहाँ हर शागिर्द कुछ सीखता भी है और दूसरों के काम भी आता है।

    अपनी मुश्किलें, अपने तजुर्बे और अपनी कामयाबी एक-दूसरे के साथ बाँटिए।

  4. 04

    लॉन्च पर आपका अपना डोमेन

    जब आपका प्रोजेक्ट दुनिया के सामने आने को तैयार होगा, तो पहले साल के डोमेन का ख़र्च हम उठाएँगे।

    नाम आपका। हक़ आपका।

  5. 05

    आपके काम की अपनी जगह

    इस वेबसाइट पर आपके नाम और आपके बनाए हुए काम के लिए एक ख़ास जगह।

    जब तक आप चाहें, आपकी कहानी यहाँ रहेगी।

  6. 06

    सफ़र आगे भी जारी रहेगा

    12 हफ़्तों के बाद फ़ेलोशिप ख़त्म होगी, साथ नहीं।

    पुराने साथी जुड़े रहेंगे, नए लोग आते रहेंगे।

    एक-दूसरे से सीखने का सिलसिला चलता रहेगा।

05 — सीधी बात

न फ़ीस। न इक्विटी। न कोई छिपी शर्त।

दरख़्वास्त की फ़ीस
0
फ़ेलोशिप की फ़ीस
0
इक्विटी
0%
आपका मालिकाना हक़
100%

जो आप बनाएँगे, वह आपका रहेगा।आपका कोड। आपका ख़याल। आपकी कंपनी।उस पर हमारा कोई हिस्सा नहीं, कोई दावा नहीं।

कोई स्टाइपेंड नहीं, कोई इनामी रक़म नहीं।

हम टूल्स का ख़र्च उठाते हैं, तनख़्वाह नहीं देते।

06 — किसके लिए है

हमें बनाने वाले चाहिए, बायोडेटा नहीं।

मेरे पास एक ख़याल है। अब उसे हक़ीक़त बनाना है।

उनके लिए जो पहले से किसी मसले, प्रोजेक्ट या ख़याल पर काम कर रहे हैं।

शुरुआत छोटी हो, तब भी कोई बात नहीं।

कुछ बनाने की ज़िद है। बस सही मसले की तलाश है।

उनके लिए जिनमें सीखने की ललक है, जो सवाल पूछते हैं, चीज़ों को नए नज़रिए से देखते हैं, मगर अभी तय नहीं कर पाए कि क्या बनाएँ।

दोनों के लिए यहाँ जगह है।

हमें किस बात की तलाश है

  • अब तक आपने क्या बनाया है, चाहे छोटा ही क्यों न हो।
  • किसी मसले को आप किस नज़रिए से देखते हैं।
  • क्या आप अपने ख़यालों को अंजाम तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

जिन बातों से हमें फ़र्क़ नहीं पड़ता

  • आपके कॉलेज का नाम या रैंक।
  • आपके नंबर।
  • आपकी अंग्रेज़ी कितनी अच्छी है।

अगर दो उम्मीदवार बराबर मज़बूत हों, तो तरजीह उसे मिलेगी जिसके लिए AI टूल्स का ख़र्च एक बड़ी रुकावट है।

कौन शामिल हो सकता है

  • आपकी उम्र कम से कम 18 साल हो।
  • आप अभी कॉलेज में पढ़ रहे हों, या पिछले एक साल में पढ़ाई पूरी की हो। विषय कोई भी हो, कॉलेज कोई भी।
  • आप भारत में रहते हों।
  • आपके पास लैपटॉप या डेस्कटॉप और इंटरनेट की नियमित सुविधा हो। अपना हो, परिवार का हो या कॉलेज की लैब का—कोई भी चलेगा।
  • आप 12 हफ़्तों तक हर हफ़्ते एक लाइव सेशन और अपने प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए वक़्त निकाल सकें।

हिंदी, अंग्रेज़ी या दोनों मिलाकर।

जिस ज़बान में आप सोचते हैं, उसी में अपनी बात कहिए।

07 — चुनाव कैसे होता है

चार क़दम। बायोडेटा नहीं।

  1. 01

    दरख़्वास्त

    बताइए कि आप कौन हैं, अब तक क्या बनाया है और किस पर काम करना चाहते हैं। फ़ॉर्म छोटा है, और आप हिंदी या अंग्रेज़ी में लिख सकते हैं।

  2. 02

    बनाइए

    चुने गए उम्मीदवारों को एक छोटी बिल्ड चुनौती मिलती है: एक हफ़्ता, कोई भी टूल, कुछ ऐसा जो चलता हो।

  3. 03

    बातचीत

    सबसे मज़बूत उम्मीदवारों से हम कुछ मिनट बात करते हैं।

  4. 04

    शामिल

    चुने गए लोग कोहोर्ट में शामिल होते हैं।

  • नंबरों की कोई कट-ऑफ़ नहीं।
  • कॉलेज की रैंकिंग नहीं।
  • बायोडेटा की छँटाई नहीं।

08 — फ़ेलोशिप कैसे चलती है

बनाइए। लॉन्च कीजिए। सीखिए। फिर से।

  1. 01

    खोजिए

    कोई ऐसा मसला ढूँढ़िए जिसे समझना ज़रूरी हो।

  2. 02

    परखिए

    जिन लोगों को यह मसला है, उनसे बात कीजिए।

  3. 03

    बनाइए

    उसका सबसे छोटा, काम का रूप बनाइए।

  4. 04

    लॉन्च कीजिए

    उसे यूज़र के सामने रखिए।

  5. 05

    सीखिए

    देखिए कि वे क्या करते हैं।

  6. 06

    सुधारिए

    जो देखा, उसके हिसाब से बदलिए।

  7. 07

    बताइए

    कोहोर्ट को दिखाइए कि क्या हुआ।

हर हफ़्ते

आप एक छोटा अपडेट लिखते हैं: क्या बनाया, किसने इस्तेमाल किया, क्या सीखा और कहाँ अटके हैं। आपकी टोली उसे पढ़ती है। फिर पूरा कोहोर्ट एक लाइव सेशन में मिलता है। बाक़ी वक़्त आपका अपना है, और बनाने में हर हफ़्ते अच्छा-ख़ासा वक़्त लगता है।

09 — मौजूदा कोहोर्ट

कोहोर्ट 01

  • 10 फ़ेलो
  • 12 हफ़्ते
  • ऑनलाइन, लखनऊ से
वेटलिस्ट में नाम लिखवाएँ

दरख़्वास्तें 15 नवंबर 2026 से ली जाएँगी।

दरख़्वास्तें शुरू
15 नवंबर 2026
दरख़्वास्तें बंद
14 दिसंबर 2026
बिल्ड चुनौती
18–24 दिसंबर 2026
कोहोर्ट की शुरुआत
जनवरी 2027

10 — इसके पीछे कौन है

एक शख़्स, फ़िलहाल।

संस्थापक Arqum Beg, शाम की धूप में

मैं Arqum Beg हूँ, और लखनऊ के पास पला-बढ़ा हूँ। मैं मेड विद इश्क़ फ़ेलोशिप इसलिए शुरू कर रहा हूँ कि अच्छे ख़याल वाले किसी शख़्स को अब शुरुआत के लिए टीम या फ़ंडिंग की ज़रूरत नहीं; उसका बड़ा हिस्सा अब टूल्स कर देते हैं।

मगर टूल्स पैसे माँगते हैं, और लखनऊ के आसपास के क़स्बों और गाँवों के बहुत-से शागिर्द यह ख़र्च नहीं उठा सकते। इसलिए टूल्स का ख़र्च मैं उठाता हूँ, और हर हफ़्ते ख़ुद मौजूद रहता हूँ।

इसके पीछे अभी कोई कंपनी या निवेशक नहीं है। यह एक शख़्स का पैसा और वक़्त है। मैं चाहता हूँ कि लखनऊ इस बात से पहचाना जाए कि उसके शागिर्द क्या बनाते हैं।

Arqum Beg, संस्थापकarqumbeg.com

11 — सवाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह मुफ़्त क्यों है? इसमें क्या शर्त है?

कोई शर्त नहीं है। फ़ेलोशिप का ख़र्च इसके संस्थापक उठाते हैं, और आगे चलकर स्पॉन्सर भी जुड़ सकते हैं। यह न कोई फ़ीस लेती है, न कोई इक्विटी। आगे चलकर मेड विद इश्क़ एक अलग प्रोग्राम शुरू कर सकता है, जो पुराने फ़ेलो की बनाई कंपनियों में निवेश करे। वह पूरी तरह आपकी मर्ज़ी पर होगा, और फ़ेलोशिप में शामिल होने से उसमें हिस्सा लेने की कोई पाबंदी नहीं बनती।

क्या मुझे कोडिंग आनी चाहिए?

नहीं। बस तेज़ी से सीखने और AI टूल्स के साथ बनाने की तैयारी होनी चाहिए।

क्या मेरे पास स्टार्टअप का ख़याल होना चाहिए?

नहीं। सीखने की ललक चाहिए, और इस बात का कुछ सबूत कि आप चीज़ें शुरू करते हैं।

क्या इंजीनियरिंग पढ़ना ज़रूरी है?

नहीं। विषय कोई भी हो, कॉलेज कोई भी।

क्या मेरा अपना लैपटॉप होना ज़रूरी है?

लैपटॉप या डेस्कटॉप और इंटरनेट की नियमित सुविधा होनी चाहिए। अपना हो, परिवार का हो या कॉलेज की लैब का—कोई भी चलेगा। हम सॉफ़्टवेयर का ख़र्च उठाते हैं, हार्डवेयर का नहीं।

क्या दरख़्वास्त हिंदी में दी जा सकती है?

हाँ। दरख़्वास्त, अपडेट और सेशन में बातचीत—हिंदी, अंग्रेज़ी या दोनों मिलाकर।

क्या फ़ेलो को पैसे मिलते हैं?

नहीं। कोई स्टाइपेंड या इनाम नहीं है। जिन AI टूल्स से आप बनाते हैं, उनका ख़र्च हम उठाते हैं, और प्रोजेक्ट लॉन्च के लिए तैयार होने पर एक डोमेन का भी।

क्या मेड विद इश्क़ फ़ेलोशिप इक्विटी लेती है?

नहीं। 0%।

जो मैं बनाऊँ, वह किसका होगा?

आपका। पूरा का पूरा।

इसमें कितना वक़्त लगता है?

12 हफ़्तों तक हर हफ़्ते एक लाइव सेशन। बनाने का काम आपके अपने वक़्त में होता है, और उसमें हर हफ़्ते अच्छा-ख़ासा वक़्त लगता है।

क्या यह ऑनलाइन है?

हाँ। सेशन ऑनलाइन होते हैं, और आप भारत में कहीं से भी जुड़ सकते हैं। फ़ेलोशिप लखनऊ से चलती है।

क्या सर्टिफ़िकेट मिलेगा?

फ़ेलोशिप का मक़सद वह है जो आप बनाते हैं, सर्टिफ़िकेट नहीं। इस वेबसाइट पर आपका पन्ना, जिस पर आपका प्रोजेक्ट है, इस बात की गवाही है कि आप फ़ेलो रहे।

क्या यह इंटर्नशिप या नौकरी है?

नहीं।

अगर मेरा चुनाव नहीं हुआ, तो मेरी दरख़्वास्त का क्या होगा?

हम उसे सँभालकर रखते हैं, ताकि आप दोबारा शुरू से भरे बिना फिर दरख़्वास्त दे सकें और हम आपको अगला कोहोर्ट खुलने की ख़बर दे सकें। आप जब चाहें, उसे हटाने को कह सकते हैं।

फ़ेलोशिप के बाद क्या होता है?

आप फ़ेलो के समूह में बने रहते हैं, आपके प्रोजेक्ट का पन्ना बना रहता है, और आप अगले कोहोर्ट की मदद कर सकते हैं।

कुछ बनाने की ज़िद है?

ज़रूरी नहीं कि आपके पास पूरा रास्ता हो।

एक ख़याल, थोड़ा हौसला और शुरुआत करने की चाह काफ़ी है।

दरख़्वास्तें 15 नवंबर 2026 से ली जाएँगी।

हम आपकी जानकारी कैसे संभालते हैं

बाक़ी सफ़र मिलकर तय करेंगे।